दोहे
1. बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नाहिं, फल लागै अतिदूर।।
इस दोहे का आशय लिखें |
उत्तर :
यह दोहे हिंदी के आदरणीय कवी कबीरदास की है | इस दोहे में कबीरदास कहते हैं कि इस दोहे में कबीरदास कहते हैं कि खजूर के पड़ के समान बडा होने से कोई फायदा नहीं है। बहुत लंबा होने के कारण पथिक को छाया नहीं मिलती है और फल भी मिलना मुश्किल है। इसका मतलब यह है कि हम बड़े होकर भी दूसरों को कोई उपकार नहीं करते तो उस बडप्पन से किसी को कोई लाभ नहीं। कबीर के मत में दूसरों की भलाई करनेवाले ही सच्चे अर्थ में बडे होते हैं।
2. रहीम वे नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।
बाँटन पारे को लगे, ज्यों मेहंदी को रंग।।
इस दोहे का आशय लिखें |
उत्तर :
यह दोहे हिंदी के लोकप्रिय कवि रहीम जी की है| इस दोहे से रहीस कहना चाहते हैं कि जो लोग दूसरों की भलाई करते हैं वे धन्य हैं | जिसप्रकार मेहंदी बाँटनेवाले के अंग पर भी मेहंदी का रंग लगा जाता है उसी प्रकार परोपकारी का शरीर भी सुशोभित होता है। .
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