Friday, November 10, 2023

जिस गली में मैं रहता हुँ

जिस गली में मैं रहता हुँ 

1. दिल्ली के बड़े हकीम हडसन साहब ने अब आगे चिराग अली को मार डाला| इस घटना के बारे में एक समाचार तैयार करें|

उत्तर :

 अभागे भिश्ती हडसन को शिकार बन गया

दिल्ली : दिल्ली के बडे हकिम हडसन साहब ने चिराग अली नामक एक मासूम भीश्ती को मार डाला । कल सुबह, अली हमेशा की तरह सडक सींचने का काम करते समय हडसन साहब अपने घोडे पर वहाँ आया । लेकिन ईश्वर के गुण गाकर अपने काम में मग्न अली ने हडसन को सलाम करने की भूल गया । इससे नाराज़ होकर हडसन ने अपने तलवार से अली का पेट चीर डाला । बाद में उसकी लाश को दील्ली दरवाज़े पर टााँग दी गई ।

2. मिर्जा गलीब की डायरी के आधार पर  एक समाचार तैयार करें 

उत्तर :

  1857 का गदरः दिल्ली में ब्रिटिश नरहत्या 

11 मई 1857, दिल्ली : अंग्रेज़ों के निरंतर अत्याचार से दिल्ली की मुसीबत बढती जा रही है । वे सीधे-सादे लोगों की भी मारना करने लगे हैं । हज़ारों लोग अब इनके हाथों से मार डाले गए हैं । कई गरीबों के घर भी जला दिए । अब लोग दिल्ली में रहने से ही डरते हैं । इसके अलावा वहां पानी और खाने के भी बहुत दिक्कत रही है | दिल्ली के बड़ी हाकीम हडसन साहब को  हिंदुस्तानियों को खून करने में बहुत मजा आता है | मासूम भीश्ती चिराग अली, बादशाह बहादुर शाह सफर के दोनों बेटे और कई जैसे आदमियों को वे मारकर उनके लाश दिल्ली दरवाज़े पर लटका दिए थे | उन्होंने हजारों दिल्लीवालों को कैदखानों में बंद कर दिया है। वे लोग वहाँ अपने मौत का इंतजार कर रहे हैं |

3. हरिगोपाल तुफ्ते के मिर्जा ग़ालिब का पत्र लिखें |

6 अक्टूबर 1857

दिल्ली - 0

प्रिय तुफ्ता जी  

 कैसे हो तुम ? सोचता हुँ तुम ठीक हो | इधर बातें कुछ उलट है | अंग्रेज़ों के निरंतर अत्याचार से दिल्ली की मुसीबत बढती जा रही है । वे सीधे-सादे लोगों की भी मारना करने लगे हैं । हज़ारों लोग अब इनके हाथों से मार डाले गए हैं । कई गरीबों के घर भी जला दिए । अब लोग दिल्ली में रहने से ही डरते हैं । इसके अलावा वहां पानी और खाने के भी बहुत दिक्कत रही है |आपके भेजे पैसे और अनाज से मेरा परिवार का गुजारा चल रहा है | 

पिछले दिन अंग्रेजों ने मेरे साथ मेरे दोनों बच्चे और पड़ोसी वालों को गिरफ्तार किया गया और हमें कैंनल ब्राउन नामक एक अंग्रेज ऑफिसर के सामने पेश किया गया | मैंने उससे कहा था कि हम मासूम लोग हैं और कविता लिखनेवाला हैं| इसलिए वे हमें छोड़ दिया | दिल्ली के बड़ी हाकीम हडसन साहब को  हिंदुस्तानियों को खून करने में बहुत मजा आता है | मासूम भीश्ती चिराग अली, बादशाह बहादुर शाह सफर के दोनों बेटे और कई जैसे आदमियों को वे मारकर उनके लाश दिल्ली दरवाज़े पर लटका दिए थे | उन्होंने हजारों दिल्लीवालों को कैदखानों में बंद कर दिया है। वे लोग वहाँ अपने मौत का इंतजार कर रहे हैं | मुझे पता नहीं क्या करना है?

 खुदा आपकी भलाई करें, मेरी दुआओं में सदा आप रहेंगे । आपके परिवार को मेरा प्रणाम  । आपकी चिट्टी की प्रतीक्षा से मैं अपना पत्र समाप्त करता हुँ |

                                                                       प्यार से

                                                                       आपका मित्र

                                                                       गालिब  


सेवा में,

हरिगोपाल तुफ्ता 

 गांधी रोड

मेरठ - 02


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