Wednesday, May 17, 2023

Class 8 Hindi शहंशाह अकबर को कौन सिखाएगा

 शहंशाह अकबर को कौन सिखाएगा


1. शहंशाह अकबर किसको देख रहे थे ?

उत्तर :

 शहंशाह अकबर गेम बीयर चर्चा में मग्न विद्वानों के एक समूह को देख रहे थे  |

2. शहंशाह अकबर ने  देखते समय विद्वानों के समूह  क्या कर रहे थे ?

उत्तर :

 वे गंभीर चर्चा में मग्न थे |

3. शहंशाह अकबर ने बीरबल से क्या मांगा?

उत्तर :

 अकबर ने कहा कि वह बहुत चतुर नहीं है लेकिन वह सब कुछ सीखना चाहता है।  इसलिए उन्होंने बीरबल से कल से उनकी पढ़ाई शुरू करने को इंतज़ाम करने को कहा।

4. “बहुत-सी ऐसी चीजें हैं जिनके बारे में मैं नहीं जानता।” - यह किसका कथन है?

उत्तर :

शहंशाह अकबर का

5. “बहुत-सी ऐसी चीजें हैं जिनके बारे में मैं नहीं जानता।” इस कथन से अकबर का कौन-सा मनोभाव प्रकट होता है?

उत्तर:

शहंशाह अकबर की सादगी इसमें समझ सकते हैं। बादशाह होने पर भी वे हर चीज़ को सीखना चाहते हैं। ज्ञान पाने की उनकी आकांक्षा इसमें हमें देख सकते हैं।

6. शहंशाह अकबर ने उनके दरबार में देखा हुआ विचित्र दृश्य क्या था?

उत्तर :

 दरबार तरह-तरह के लोगों से भरा हुआ था | जिसमें बच्चे और बुजुर्ग थे, ग्रहणीयाँ और धोबीनें थी, किसान और कचरा बीननेवाले थे, दुकानदार और लिपिक थे, मुर्ख और ज्ञानी थे |

7. बीरबल समाज के विभिन्न प्रकार के लोगों को दरबार में बुला लाया। कारण क्या होगा?

उत्तर:

बीरबल शहंशाह अकबर को यह बात  समझने की कोशिश किया कि  हर व्यक्ति को कुछ हुनर है। हरेक हमें कुछ न कुछ सिखा सकता है। तो सभी शिक्षक भी है और विद्यार्थी भी |

8. “हमेशा ही सीखता हूँ।” इससे क्या मतलब है?

उत्तर:

इसका मतलब यह है कि हम मानव हमेशा कुछ न कुछ सीख रहे हैं । मानव का ज्ञान कभी संपूर्ण नहीं होता।

9. बूढ़ी महिला कौन है ?

उत्तर :

 बीरबल की माँ और श्रेष्ठ गुरु |

10. बीरबल की श्रेष्ठ गुरु कौन है ?

उत्तर :

 उनकी माँ / बूढ़ी महिला 

11. यह बूढ़ी महिला किन-किन की प्रतिनिधि हो सकती है?

उत्तर:

यह बूढ़ी महिला माताओं की प्रतिनिधि हैं। माँ सबकी पहली और श्रेष्ठ गुरु हैं।

12. "ये मेरे पहले और श्रेष्ठ गुरुओं में से हैं " - यह किसका कथन है?

उत्तर :

बीरबल का

13. बूढ़ी महिला ने शहंशाह अकबर को क्या सलाह दिया?

उत्तर :

 बूढ़ी महिला ने कहा कि बुद्धिमान व्यक्ति जानते हैं कि सब कुछ सीखना संभव नहीं है | लेकिन सब को यह सीखना चाहिए कि अच्छा इंसान कैसे बन जा सकता है  |

14. "मैंने तो बस आपके आदेशों का पालन किया है |"- यह किसने किससे कहा?

उत्तर :

 बीरबल ने अकबर से 

15. 'शख्स' का समानार्थी शब्द कौन सा है ?

उत्तर :

व्यक्ति

16. सही मिलान करें |

 जो खेती करता है  - धोबीन

 जो कपड़ा धोती है  - ज्ञानी

 जिसे कोई ज्ञान ना हो - किसान

 जो लेखा-जोखा करता है  - मूर्ख

 जिसको ज्ञान है  - लिपिक

उत्तर :

जो खेती करता है  - किसान

 जो कपड़ा धोती है  - धोबीन

 जिसे कोई ज्ञान ना हो - मूर्ख

 जो लेखा-जोखा करता है  - लिपिक

 जिसको ज्ञान है  - ज्ञानी

17. "सभी शिक्षक भी है और विद्यार्थी भी "- इसका मतलब क्या है?

उत्तर :

हर व्यक्ति को कुछ हुनर है। इसलिए हरेक हमें कुछ न कुछ सिखा सकता है। तो सभी शिक्षक भी है और विद्यार्थी भी |

18. बीरबल का उत्तर सुनकर अकबर के मन में क्या-क्या विचार आए होंगे | उनके विचारों को डायरी के रूप में लिखें |

उत्तर :

23 जून 2023

 बुदवार

 आज मेरे जीवन में एक अविस्मरणीय दिन था | मैं आज कैसे भूल सकता हूँ ? आज बीरबल ने मुझे  एक सबक सिखाया | मैंने उससे  हर चीज़ को मुझे सिखाने की इंतज़ाम करने की  आदेश दिया था | लेकिन बीरबल बहुत चतुराई था  | उसे जानता था कि किसी आदमी के लिए इस दुनिया में  सब कुछ सीखना संभव नहीं है  | इसे मुझे समझाने के लिए  वह मेरे दरबार  तरह-तरह के लोगों से भरा दिया | जिसमें बच्चे और बुजुर्ग थे, ग्रहणीयाँ और धोबीनें थी, किसान और कचरा बीननेवाले थे, दुकानदार और लिपिक थे, मुर्ख और ज्ञानी थे |इससे मुझे यह बात  समझ गया कि  हर व्यक्ति को कुछ हुनर है। हरेक हमें कुछ न कुछ सिखा सकता है। तो सभी शिक्षक भी है और विद्यार्थी भी | अंत में बीरबल ने एक बूढ़ी महिला को  ले आया | वह असलियत में उसकी माँ थी |बूढ़ी महिला ने मुझे कहा कि बुद्धिमान व्यक्ति जानते हैं कि सब कुछ सीखना संभव नहीं है | लेकिन सब को यह सीखना चाहिए कि अच्छा इंसान कैसे बन जा सकता है  | मैं उनकी सादगी पर प्रभावित हआ था | बीरबल सच में भाग्यशाली हो क्योंकि  उसको इतनी समझदार गुरु मिलिं |

24. ज्ञानार्जन पर एक टिप्पणी लिखें।

ज्ञान :जीवन के सबसे बड़े शक्ति  

आज के समय की सबसे बड़ी शक्ति ज्ञान ही है। ज्ञान का क्षेत्र बहुत विशाल है। यह जीवन-पर्यंत चलता है। आज जिस व्यक्ति के पास ज्ञान है, उसके पास सबसे बड़ा ताकत है । यह ज्ञान ही है जो मनुष्य को अन्य जीव-जन्तुओं से श्रेष्ठ बनाता है।हम कई प्रकार से ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।  हम शिक्षकों, समाज, अनुभवों और पुस्तकों से ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।  किसी भी व्यक्ति के पहले शिक्षक उसके माता-पिता होते हैं। हर व्यक्ति की अपनी प्रतिभा होती है।  इसलिए, हर कोई अपने-अपने क्षेत्र में एक साथ एक छात्र और एक शिक्षक है।

25. इस कहानी के मुख्य पात्र कौन-कौन हैं और उनकी वेश-भूषा कैसी हैं?

उत्तर :

पात्र : बादशाह अकबर, बीरबल और बूढ़ी महिला।

वेश-भूषा :

बादशाह अकबर : राजसी कुर्ता और पाइजामा। सिर पर राजसी पगडी। तलवार कमर पर टाँग रही है। आभूषण पहनते हैं।

बीरबल: विद्वानों के समान वेश धारण किया है। कुर्ता - पाजामा पहनता है  | सिर पर पगड़ी है |

बूढ़ी महिला : साड़ी पहनती है  | कोई आभूषण नहीं है  |


Class 9 Hindi पुल बनी थी माँ

 पुल बनी थी माँ


पुल - പാലം 

बनना - നിർമ്മിക്കുക 

भाई - സഹോദരൻ 

भाईयों - സഹോദരങ്ങൾ 

बीच - ഇടയിൽ 

जिसमें - അതിൽ 

आए दिन - കഴിഞ്ഞു പോയ ദിനങ്ങൾ 

दौड़ना - ഓടുക 

बेधड़क - ഭയമില്ലാതെ / തടസ്സമില്ലാതെ 

बिना - കൂടാതെ 

हरी - പച്ച 

लाल - ചുവപ്പ് 

बत्ती - വെളിച്ചം 

लोग - ജനം 

बाद -ശേഷം 

अचानक -പെട്ടെന്ന് 

टूटना - പൊട്ടുക/ തകരുക

धीरे - धीरे - പതിയെ പതിയെ / സാവധാനം 

देखना - കാണുക/  നോക്കുക 

मानना - മനസ്സിലാക്കുക/ അറിയുക 

बूढ़ा -  വൃദ്ധൻ 

बूढ़ी - വൃദ്ധ 

बूढ़ी होना - വൃദ്ധയാവുക 

बार - बार - വീണ്ടും വീണ്ടും / ആവർത്തിച്ചുള്ള 

कहना - സംസാരം  

आदत - പതിവ്/ ശീലം 

आवाज़ - ശബ്ദം 

हाथों - हाथ रहना - നോക്കി വളർത്തുക / പരിപാലിക്കുക 

कंधा - തോൾ / ചുമൽ 

कंधों - തോളുകൾ/ ചുമലുകൾ 

कंधों में आना - ഉത്തരവാദിത്തമായി മാറുക 

महसूस करना - അനുഭവപ്പെടുക/  തോന്നുക 

वृषब कंधों - ശക്തമായ തോളുകൾ 

भारी होना - ഭാരമാവുക 

तक - വരെ 

जीवित रहना - ജീവിക്കുക 

बदलना - മാറ്റുക 

कंधे बदलना - ഉത്തരവാദിത്വം കൈമാറുക 

आखिर - അവസാനം 

कंधों से उतर जाना  - മരിക്കുക 

कंधे उतरना - നിസ്സഹായരായി മാറുക / നിരാലംബരാവുക

Sunday, May 14, 2023

बीरबहूटी Word Meanings

 बादल - മേഘം 

बहुत - വളരെ / കൂടുതൽ 

बरसना - പെയ്യുക 

फिर भी - എന്നിട്ടും 

सारा - മുഴുവൻ / അധികം 

बहुत सारा पानी - വളരെയധികം വെള്ളം 

उनमें - അവയിൽ 

बचना - അവശേഷിക്കുക

खेत - വയൽ 

जंगल - കാട്

ऊपर - മുകളിൽ 

छाना - വ്യാപിക്കുക 

आकाश - ആകാശം 

मेघ - മേഘം 

भरना - നിറയുക 

छाया - നിഴൽ 

गीला - നനഞ്ഞ / ഈർപ്പമുള്ള 

हवा - കാറ്റ് 

गीली हवा -  ഈർപ്പമുള്ള കാറ്റ്   

इधर -उधर - ഇവിടെയും അവിടെയും 

घूमना - ചുറ്റി കറങ്ങുക

पेड़ - മരം 

तना - തടി 

पेड़ों के तने - മരത്തടി 

अभी भी - ഇപ്പോഴും 

मूँगफली - നിലക്കടല 

हरा - പച്ച 

पीला - മഞ്ഞ 

फूल - പൂവ് 

पीले फूल - മഞ്ഞ പൂക്കൾ

 छोटा - छोटा - ചെറിയ ചെറിയ 

उगना - വളരുക / മുളച്ചു പൊങ്ങുക 

लंबा - നീളമുള്ള 

पतला - മെലിഞ്ഞ 

पातों - ഇലകൾ 

बूँद - തുള്ളി  

अटकना - പറ്റി കിടക്കുക /  തൂങ്ങിക്കിടക്കുക  

हरियाली - പച്ചപ്പ്  

गंध - ഗന്ധം / മണം 

घुलना - അലിയുക /ലയിക്കുക

बीरबहुटी - മഴക്കാലത്ത് കാണുന്ന ഒരിനം പ്രാണി/ ഇന്ദ്ര ഗോപം   

मिलना - കണ്ടുമുട്ടുക / പരിചയപ്പെടുക / ലഭിക്കുക 

पहले - മുമ്പ് 

निकलना - പുറപ്പെടുക / പുറത്തെടുക്കുക 

कस्बा - കവല / ചെറിയ ടൗൺ 

सटे - തൊട്ടടുത്തുള്ള / ചേർന്നുള്ള 

खोजना - അന്വേഷിക്കുക ढूंढना / तलाशना 

सुर्ख - ചുവപ്പ്  लाल 

मुलायम - മൃദുവായ

गदबदी - മിനുസമുള്ള 

धरती -  ഭൂമി / മണ്ണ് 

चलती - फिरती - ചുറ്റി സഞ്ചരിക്കുക

खून - രക്തം 

प्यारी -प्यारी - മനോഹരമായ 

बस्ता - സ്കൂൾ ബാഗ് 

पीठ   - പുറം  

लदे होना - ചുമക്കുക 

कंधों - ചുമൽ / തോൾ 

एक - दूसरे - പരസ്പരം 

नज़दीक - അടുത്ത് 

बल्कि - മറിച്ച്

कहना - പറയുക 

बिलकुल - തികച്ചും 

भूरी - തവിട്ട് നിറമുള്ള 

ज़मीन - മണ്ണ് 

 बैठना  - ഇരിക്കുക

देखना - കാണുക/ നോക്കുക 

बोलना - സംസാരിക്കുക 

सुनना - കേൾക്കുക 

घंटी - ബെല്ല് 

घंटी लगना - ബെല്ലടിക്കുക 

लेकिन - പക്ഷെ 

स्याही - മഷി 

भरवाना - നിറയ്പ്പിക്കുക 

उन्नीस सौ इक्यासी - 1981

साल - വർഷം 

सवारी गाड़ी - യാത്രാ വാഹനം 

मालगाड़ी - ചരക്ക് വാഹനം 

सदा - എപ്പോഴും 

सदा भरा - എപ്പോഴും നിറഞ്ഞിരിക്കുന്ന

लगभग - ഏകദേശം 

सूनी - വിജനമായ

तंग - ഇടുങ്ങിയത്

गली - തെരുവ്

सूनी तंग गालियाँ - വിജനവും ഇടുങ്ങിയതുമായ തെരുവുകൾ 

खामोश - നിശബ്ദമായി 

खड़ा - നിൽക്കുന്ന 

बिजली का खम्भा - വൈദ്യുത കാലുകൾ /Post

बीच - ഇടയിൽ 

खींचना - വലിച്ചിടുക/ വലിക്കുക / വലിച്ചു കെട്ടുക  

तार - കമ്പി/ വയർ 

कतारा - ക്യൂ/ വരി 

जहाँ -तहाँ - അവിടെയും ഇവിടെയും / അങ്ങുമിങ്ങും 

दिखाई पड़ना - കാണപ്പെടുക 

घंटीयाँ बजाना - മണിമുഴക്കുക  

फेरी वाले - തെരുവ് കച്ചവടക്കാർ

गधों - കഴുതകൾ

खुरों - കുളമ്പുകൾ

आवाज़ - ശബ്ദം 

बदन - ശരീരം

उघाड़ना - പ്രദർശിപ്പിക്കുക 

बदन उघाड़े - ശരീരം പ്രദർശിപ്പിക്കുന്ന / വസ്ത്രം ധരിക്കാത്ത 

कुम्हार - കുശവൻ / മൺപാത്രക്കാരൻ 

दृश्य - ദൃശ്യം/ കാഴ്ച 

गुजरना - കടന്നുപോവുക / സഞ്ചരിക്കുക 

दूकान - കട 

दूकानवाला / दुकानदार - കച്ചവടക്കാരൻ

छिड़कना - തളിക്കുക/ കുടഞ്ഞു കളയുക 

पहुँचना - എത്തിച്ചേരുക

देना - നൽകുക / കൊടുക്കുക

बोतल - കുപ്പി / പാത്രം 

खाली होना - കാലിയാവുക 

कल - നാളെ / ഇന്നലെ

घड़े - കുടങ്ങൾ 

ढुलाना - കമയ്ത്തുക/ മറിക്കുക 

पूछना - ചോദിക്കുക 

कौन -सी - ഏത്?

पढ़ना - പഠിക്കുക / വായിക്കുക

बुरे मन - ചീത്ത മനസ്സ് / സങ്കടം 

बताना - സംസാരിക്കുക 

खुश - സന്തോഷം 

कॉपी - നോട്ട് 

काम करना - ജോലി ചെയ്യുക 

कॉपी में काम करना - നോട്ട് എഴുതുക 

किताब पढ़ना - പുസ്തകം വായിക്കുക 

चमकना - തിളങ്ങുക 

तलवार - വാൾ 

पुराना - പഴയത് 

सन सत्तावन - 1957

माटसाब - മാഷ് 

खेल घंटी - കളിയുടെ പിരിയഡ് 

काँपना - വിറയ്ക്കുക 

जगह - സ്ഥലം 

 बैठने की जगह - ഇരിപ്പിടം 

जाँचना - പരിശോധിക്കുക 

ज़रा सी - അല്പം / ചെറിയ 

गलती - തെറ്റ് 

फेंकना - വലിച്ചെറിയുക/ ഉപേക്ഷിക്കുക/ തള്ളുക 

झापड़ मारना - കഠിനമായി അടിക്കുക 

शुरू होना - ആരംഭിക്കുക 

रुकना - നിർത്തുക 

भूलना - മറക്കുക

बाल - തലമുടി 

बालों - തലമുടികൾ 

पंजा फँसाना - കുത്തിപ്പിടിക്കുക 

शायद - ഒരുപക്ഷേ /വാസ്തവത്തിൽ 

पाना - കാണുക/ മനസ്സിലാക്കുക

पाकर - കണ്ടുകൊണ്ട് / മനസ്സിലാക്കിക്കൊണ്ട് 

पकड़ना - വെക്കുക 

छोड़ना - ഉപേക്ഷിക്കുക/ വെറുതെ വിടുക 

चेहरा - മുഖം 

भयभीत चेहरा - ഭയന്ന മുഖം 

बुरी तरह - വല്ലാതെ 

डरना - ഭയക്കുക 

पाँव - കാല് 

खड़े -खड़े - നിന്ന് നിൽപ്പിൽ 

गिरना - വീഴുക 

खराब होना - കേടാവുക 

मन खराब होना - സങ്കടപ്പെടുക 

पीट लेना - അടിക്കുക 

मगर - എന്നാൽ 

सामने - മുന്നിൽ 

शर्मिंदा - ലജ്ജ 

महसूस करना - തോന്നുക/ അനുഭവപ്പെടുക

नज़र - നോട്ടം / ദൃഷ്ടി 

पास - അടുത്ത് 

नज़र मिलाना - നോക്കുക 

छुट्टी  - അവധി 

बाद - ശേഷം 

खुलना / खोलना - തുറക്കുക 

सिर - തല 

पट्टी - ബാൻഡേജ്

सफेद पट्टी - വെളുത്ത ബാൻഡേജ് 

बँधना - കെട്ടുക

सुल्ताना डाकू  - കൊള്ളക്കാരുടെ രാജ്ഞി  

चिढ़ाना - കളിയാക്കുക / ദേഷ്യം പിടിപ്പിക്കുക

परेशान होना  - അസ്വസ്ഥനാവുക / പരിഭ്രാന്തനാവുക  

छत - മേൽക്കൂര 

लंगड़ी टाँग - ഒറ്റക്കാലിൽ കൊക്കി കളിക്കുക 

लग जाना - മുറിവ് ഉണ്ടാവുക / ബാധിക്കുക  

ज़िद करना - വാശി പിടിക്കുക  

हमेशा - എപ്പോഴും  

चारों ओर - നാലുപാടും 

मूर्ती - പ്രതിമ 

मुस्कुराना - പുഞ്ചിരിക്കുക 

नीम का पेड़  - വേപ്പ് മരം

टाली - കൊമ്പ് 

झूमना - ആടുക / നൃത്തം ചെയ്യുക 

चढ़ना - കയറുക

झूलना - തൂങ്ങിക്കിടക്കുക/ തൂങ്ങിയാടുക  

अचानक - പെട്ടെന്ന്  

टूटना - പൊട്ടുക/ തകരുക  

टूटे स्टूल - പൊട്ടിയ സ്റ്റൂൾ 

कील - ആണി 

पिंडली - കാൽമുട്ടിന് പിറകുവശം 

गहरा - ആഴമുള്ള 

गड्ढा - മുറിവ് /കുഴി 

बंधवाना  - കെട്ടിക്കുക 

अस्पताल - ആശുപത്രി 

कक्षा  - ക്ലാസ്സ് 

पांचवीं कक्षा  - അഞ്ചാം ക്ലാസ് 

छठी कक्षा  - ആറാം ക്ലാസ് 

अगले साल - അടുത്തവർഷം 

भेजना - അയക്കുക 

अकेला - ഒറ്റക്ക് 

रहना - താമസിക്കുക 

पता - അറിവ് /വിലാസം 

यानी - അതായത്

आखिरी बार  - അവസാനത്തെ തവണ 

चीज़ - വസ്തു 

छूकर देखना  -  തൊട്ട് നോക്കുക 

आँख - കണ്ണ് 

आँसू - കണ്ണുനീർ 

डबडबाई आँखों - കരഞ്ഞുകലങ്ങിയ കണ്ണുകൾ

हॅसना - ചിരിക്കുക 

तरह - പോലെ 

सूरत - മുഖം 

रोना - കരയുക 

रोनी सूरत  - കരയുന്ന മുഖം 

डेढ़ - ഒന്നര

डेढ़ महीना - ഒന്നരമാസം 

बाकी - ബാക്കി/ അവശേഷിക്കുന്ന 

घटा - മേഘം 

तेज़ - ശക്തമായ / വേഗത്തിലുള്ള  

तेज़ हवा - ശക്തമായ കാറ്റ് 

भूरे बाल - തവിട്ട് നിറത്തിലുള്ള തലമുടി  

रंग - നിറം  

दूसरी दिशा - മറ്റൊരു ദിക്ക്  

निशान - അടയാളം

Friday, May 5, 2023

पक्षी और दीमक Class 9 Hindi

 पक्षी और दीमक

                                                   मुक्तिबोध

1. 'पक्षी और दीमक' किस विधा की रचना है?

उत्तर :

 कहानी 

2 'पक्षी और दीमक' किसकी रचना है?

उत्तर :

 मुक्तिबोध की 

3. 'पक्षी और दीमक कहानी' की मुख्य पात्र कौन- कौन हैं ?

उत्तर :

एक नौजवान पक्षी , एक गाड़ी वाला  और नौजवान पक्षी के पिता 

4. नौजवान पक्षी के विशेषताएं क्या क्या है ?

उत्तर :

 उसको नीले आसमान में बहुत ऊंचाइयों पर  उड़ जा सकता था | उसके साथ उसके पिता और मित्र भी थे | उसकी निगाहों में भी बहुत तेज थी | उनकी दूर-दूर की भनक और महक भी मिल जाती  |

5. नौजवान पक्षी जमीन पर क्या देखा ?

उत्तर :

 एक गाड़ी वाला बड़े-बड़े बोरों में दिमकें भरकर बेचता है |

6. गाड़ी वाला चिल्ला- चिल्लाकर क्या कहता है ?

उत्तर :

 "दो दीमकें लो एक पंख दो |"

7. गाड़ीवाला दीमक के बदले क्या खरीदता है ?

उत्तर :

पंख

8. गाड़ीवाला पंख के बदले क्या बेचता है ?

उत्तर :

दीमकें

9. पक्षी और गाड़ी वाला के बीच में हुआ सौदा क्या था?

उत्तर :

 पक्षी  गाड़ी वाला को अपने पंख देकर दीमकें खरीदेगा |

10. पक्षी गाड़ीवाला से दीमक खरीदने का निश्चय क्यों किया?

उत्तर :

नौजवान पक्षी को दीमकें बढ़िया शौक था। पक्षी जानता है कि दीमकें सिर्फ जमीन पर मिलेंगे | कभी-कभी पेड़ों के ऊंची टालों तक वे अपना मटियाला लंबा घर  बना लेती,  लेकिन  ऐसे कुछ ही पेड़ होते , और वे सब एक जगह नहीं मिलते  | इसीलिए नौजवान पक्षी को यह सौदा बड़ी सुविधा लगा  |

11. पक्षी अपने पंख देकर दीमक लेता है। यहाँ पक्षी का कौन-सा मनोभाव प्रकट होता है?

उत्तर:

नौजवान पक्षी को अपने भविष्य और अस्तित्व के बारे में कोई चिंता नहीं है। वह हमेशा बिना मेहनत से, आसानी से मिलनेवाले भोजन मिलने की चाहनेवाला है |

12. "दीमकें हमारा स्वाभाविक आहार नहीं है, और उनके लिए अपने पंख तो हरगिज़ नहीं दिए जा सकते।"- यह किसका कथन है? वे ऐसे क्यों कहा?

 उत्तर:

  यह नौजवान पक्षी के पिता की कथन है | नौजवान पक्षी अपने पंख देकर  गाड़ी वाला से  दीमकें खरीदता है  | इसी कारण  से वह अपना अस्तित्व नष्ट होता है | पंख के बिना  पक्षी को उड़ नहीं सकते  | इसीलिए पिता ने ऐसे कहा  |

13. 'दीमकें हमारा स्वाभाविक आहार नहीं है, और उनके लिए अपने पंख तो हरगिज़ नहीं दिए जा सकते।’-इस कथन के आधार पर वर्तमान संस्कृति का विश्लेषण करें।

उत्तर:

यह हमारी खाद्य संस्कृति की ओर संकेत किया गया है। हम अपने स्वाभाविक आहार को छोड़कर फास्टफुड़ संस्कृति के पीछे भाग रहे हैं। पहले यह बहुत सुविधा लगेगा  | लेकिन अंतिम परिणाम भयानक होगा।

14. पक्षी को बेवकूफ़ कहने के संबंध में आपकी राय क्या है?

उत्तर:

यह बिलकुल सही है। मैं इससे बिल्कुल सहमत हूँ | यह पक्षी प्रलोभन में फंसकर अपना अस्तित्व खोता है। दीमकें के बदले पंख देकर उसको अपने उड़ने की क्षमता नष्ट हो गया | अंत में वह अपना अस्तित्व वापस लेने का प्रायास तो करता है। लेकिन तब तक उसका सब कुछ नष्ट हो जाता है। पक्षी का व्यवहार बेवकूफ़ी ही है।

15. कहानी के अंत में नौजवान पक्षी को क्या हुआ ?

उत्तर :

 दीमक के बदले  अपने पंख देने के बाद पक्षी को  उड़ने की अपनी क्षमता खो दी | वह खुद दीमकें इकट्ठा करके  गाड़ी वाला से  अपने नष्ट हुवा पंख वापस लेने की कोशिश किया  | लेकिन गाड़ी वाला  उसको  पंख न दिया और उसे बेवकूफ बुलाकर चला गया  | इसके बाद एक काली बिल्ली आकर उसे पकड़कर  ले गया  |

16. आज के ज़माने में ‘पक्षी और दीमक’ कहानी की प्रासंगिकता कहाँ तक है? चर्चा करके टिप्पणी लिखें।

उत्तर:

 पक्षी और दीमक 

 हिंदी साहित्य के प्रगतिशील  कहानीकार  श्री. मुक्तिबोध के एक  सुंदर कहानी है ‘पक्षी और दीमक’। इसमें एक नौजवान पक्षी एक गाड़ीवाला से  अपना पंख देकर दीमक खरीदकर खाने लगता है। अपने माता-पिता के उपदेश तक को वह नहीं मानता  है। अंत में पक्षी को  उड़ने की अपनी क्षमता खो दी | बहुत देर के बाद   उसको समझ आया कि वह अपने अस्तित्व को नष्ट कर गया  | इसके बाद  वह खुद दीमकें इकट्ठा करके  गाड़ी वाला से  अपने नष्ट हुवा पंख वापस लेने की कोशिश किया  | लेकिन गाड़ीवाला  उसको  पंख न दिया और उसे बेवकूफ बुलाकर चला गया  | इसके बाद एक काली बिल्ली आकर उसे पकड़कर  ले गया  |

 यह कहानी की असलियत में आजकल भी प्रासंगिकता है  | विज्ञापन के ज़रिए हमारे सामने कई प्रलोभन प्रस्तुत करते हैं। हम नौजवान बिना सोचे-समझे उसमें फँस जाते हैं। अंत में हम अपना अस्तित्व खोते हैं। जब हम अपनी गलती समझते हैं, तब तक सब कुछ नष्ट हो जाता है। आज के ज़माने में यह कहानी बिलकुल प्रासंगिक है।

17. पक्षी की चरित्रगत विशेषताओं का विश्लेषण करें। टिप्पणी लिखें।

उत्तर:

‘हिंदी साहित्य के प्रगतिशील  कहानीकार  श्री. मुक्तिबोध के सुंदर कहानी ‘पक्षी और दीमक’ का मुख्य पात्र है नौजवान पक्षी  | उसको नीले आसमान में बहुत ऊंचाइयों पर  उड़ जा सकता था | उसके साथ उसके पिता और मित्र भी थे | उसकी निगाहों में भी बहुत तेज थी | उनकी दूर-दूर की भनक और महक भी मिल जाती  | उसको दीमकें बढ़िया शौक था। वह एक आलसी स्वभाव का है। मेहनत के बिना भोजन पाने का इच्छुक है। इसी कारण से वह जल्दी से गाड़िवाला के प्रोलोभन में फँस जाता है | वह गाड़ीवाला से  अपना पंख देकर दीमक खरीदकर खाने लगता है। अपने माता-पिता के उपदेश तक को वह नहीं मानता  है। अंत में पक्षी को  उड़ने की अपनी क्षमता खो दी | बहुत देर के बाद   उसको समझ आया कि वह अपने अस्तित्व को नष्ट कर गया  | इसके बाद  वह खुद दीमकें इकट्ठा करके  गाड़ी वाला से  अपने नष्ट हुवा पंख वापस लेने की कोशिश किया  | लेकिन गाड़ीवाला  उसको  पंख न दिया और उसे बेवकूफ बुलाकर चला गया  | इसके बाद एक काली बिल्ली आकर उसे पकड़कर  ले गया  |

18. दोनों का सौदा तय हो जाता है  | अपनी चोंच से एक पर को खींचकर  तोड़ने में उसे तकलीफ होती है ; लेकिन उसे वह बर्दाश्त कर लेता है  | मुंह में बड़े स्वाद के साथ दो दीमकें दबाकर वह पक्षी फुर्र से उठ जाता है |

 Question : इस घटना के बारे में  एक पटकथा का दृश्य लिखें  |

दृश्य -एक

स्थान : जंगल की एक रास्ता

समय : सबेरे नौ बजे

पात्र   : नौजवान पक्षी और एक गाड़िवाला

दृश्य का विवरण :

नौजवान पक्षी जंगल के रास्ते से सटे एक पेड़ के डाल पर बैठता है। सड़क से एक गाड़ीवालाआता है। उसके गाड़ी में भरे बोरों में दीमकें हैं। गाड़ीवाला चिल्ला - चिल्लाकार कहते है '‘दो दीमकें लो… एक पंख दो... " पक्षी और गाड़ीवाला बात करते हैं।

संवाद :

गाड़ीवाला : दो दीमकें लो… एक पंख दो...

पक्षी : अरे गाड़ीवाले, मुझे दीमकें चाहिए |

गाड़ीवाला : अच्छा | तेरा एक पंख खींचकर तोड़ने मुझे दो, मैं दो दीमकें दे दूंगा।

पक्षी : पर! मुझे कैसे पंख दे सकता हूँ? मुझे बहुत दर्द होगा |

गाड़ीवाला : हाँ, पर। यह दीमक तो बहुत स्वादिष्ट है। चाहे तो ले लो।

पक्षी : ठीक है, गाड़ीवाले। लो एक पंख। दो दीमकें दो।

(पक्षी कठिनाई से पर तोड़कर गाड़ीवाले को देता है और दो दीमकें लेकर उड़ जाता है)

गाड़िवाला : लो ये दीमकें, और खाओ खुशी से |

पक्षी : (एक दीमक को खाया और कहा ) तुम बिलकुल ठीक हो | ये दीमकें बहुत स्वादिष्ट है | मैं रोज़ आकर खरीदूँगा |

टीवी पटकथा Class 9 Hindi

 टीवी

                       पटकथा           - वरुण ग्रोवर

 1. 'टीवी' किस विधा की रचना है ?

उत्तर :

पटकथा      

2. 'टीवी' पटकथा किसकी रचना है?

उत्तर :

वरुण ग्रोवर की 

3. . 'टीवी' पटकथा  के मुख्य पात्र कौन - कौन है ?

उत्तर :

 गोपु,चुन्नी, और लल्लू  |

4. गोपू जमीन पर झूकर क्या पकड़ा है ?

उत्तर :

 एक मकोड़ा को

5. गोपु जमीन से क्यों मकोड़ा को पकड़ लिया ?

उत्तर :

गोपू, चुन्नी और लल्लू ने टीवी देखने के लिए मनोहर चाचा के घर जाने का फैसला किया।  चुन्नी और लल्लू अपनी माँ को इसके बारे में न बताने का  कसम खाने केलिए गोपू, मकोड़ा  को अपने हाथ में पकड़  लिया।

6. मकोड़ा को पकड़कर चुन्नी क्या कसम खाया ?

उत्तर :

वे चुपके से दूसरे गांव में जाकर मनोहर चाचा के घर से टीवी देखते और वापस आ जाते | माँ और किसी दूसरों को भी यह बातें न कहेगा  | 

7. गोपू, चुन्नी और लल्लू ने क्यों मनोहर चाचा के घर जाने का फैसला किया?

उत्तर :

टीवी देखने के लिए

8. कसम खाना से क्या मतलब है?

उत्तर:

 सत्य का प्रण करना।

9. गोपू के इलाके में टीवी नहीं आता था। इसके क्या कारण हो सकते हैं?


उत्तर:

टीवी का टावर दूसरे गांव में था  | बच्चों के गांव पहाड़ इस तरफ था | इसीलिए उनके गांव में के सिग्नल नहीं मिला |

10. गोपू को टीवी का कार्यक्रम जादू-सा लगा। क्यों?

उत्तर:

 टीवी के अंदर से तस्वीर और आवाज़ आने तो गोपू हैरान हो गया । वह गोपू को पहला अनुभव था | उसकी तकनीकी बातों से वह अनजान था । इसलिए उसे टीवी का कार्यक्रम जादू-सा लगा।

11. चुन्नी के रुआंसी होने का क्या कारण है?

उत्तर:

टीवी देखने के लिए तीनों मनोहर चाचा का घर निकले थे। लेकिन वे खो गए | देर होने की बाद भी उनको मनोहर चाचा का .घर कहीं दिखता नहीं सकता। सो वह डर गई थी।

12. मनोहर चाचा का घर पहचानने में गोपू को दिक्कत हुई। क्यों?

उत्तर:

मनोहर चाचा का घर पहचानने के लिए गोपू के पास एक ही निशान था- टीवी का एन्टीना। लेकिन यहाँ सभी के घरों के छतं पर एन्टीना था। इसलिए उसे मनोहर चाचा का घर पहचानने में दिक्कत हुई।

13. सब्जी मंडी की भीड़ में कौन पीछे रह गया?

उत्तर :

लल्लू

14. मंडी में कौन एक लंबा आदमी को टकरा गया?

उत्तर :

चुन्नी

15. सड़क पार करने समय गोपु और लल्लू को क्या हुआ?

उत्तर :

सामने से तेज़ी से एक बस आया और चुन्नी दौड़कर सड़क पार किया  | लेकिन गोपु और लल्लू खड़े रह गया | ज़ोर से ब्रेक लगाकर ड्राइवर गुस्से से उनको डांटा |

16. मनोहर चाचा के घर में बच्चे टीवी देखते समय क्या हुआ?

उत्तर :

 बिजली चली गई |

17. गोपू घर पहुंचा। वह यादों में खो गया। फिर डायरी लिखने लगा। लिखें, गोपू की डायरी।

उत्तर :

20 जून 2023

रविवार 

 आज मेरे जीवन के सबसे अविस्मरणीय दिन था | सबेरे जो किया ठीक नहीं हुआ। घर से  टीवी देखने के लिए चुन्नी और लल्लू के साथ निकला | कितने खुश में था हम उसी समय | रास्ते बहुत कठिन था  | एक बार  सब्जी मंडी कीभीड़ में लल्लू पीछे रह गया और चुन्नी एक लंबा आदमी को टकरा गई | सड़क पार करते समय एक बस हमें टक्कर मारने आई | ड्राइवर ने जोर से ब्रेक लगाकर हमें डांटा | मनोहर चाचा का घर इतना दूर था, यह जानता नहीं था। बेचारे लल्लू और सुन्नी  मेरी बातों पर विश्वास कर गए। मेरा तो एक ही निशान था- एन्टीना। लेकिन वहाँ तो हर मकान के ऊपर एन्टीना थे। मैं क्या करूँ? हम समझ गया कि हमें खो गए | चुन्नी रोने लगी  | मैं और लल्लू भी डर हो गए | अंत में मनोहर चाचा आकर हमें ले गए | मनोहर चाचा के घर में हम तीनों  टीवी देखने के लिए हमें बेसब्री से बैठा  | लेकिन दुर्भाग्य है कि टीवी चलाते समय बिजली चली गई | किसी को बिना बताए घर से निकल जाने को यह ईश्वर की सजा है | आगे से ऐसा नहीं करूँगा। घरवालों से कहकर ही कहीं जाऊँगा।

18. चुन्नी घर पहुंचा। वह यादों में खो गई । फिर डायरी लिखने लगी । लिखें, चुन्नी की डायरी।

उत्तर :

20 जून 2023

रविवार 

 आज मेरे जीवन के सबसे अविस्मरणीय दिन था | सबेरे जो किया ठीक नहीं हुआ। घर से  टीवी देखने के लिए गोपू और लल्लू के साथ निकला | कितने खुश में था हम उसी समय | रास्ते बहुत कठिन था  | एक बार  सब्जी मंडी कीभीड़ में लल्लू पीछे रह गया और मैं एक लंबा आदमी को टकरा गई | सड़क पार करते समय एक बस हमें टक्कर मारने आई | ड्राइवर ने जोर से ब्रेक लगाकर हमें डांटा | मनोहर चाचा का घर इतना दूर था, यह जानता नहीं था। हम गोपू के बातों पर विश्वास कर गए। उसको एक ही निशान था- एन्टीना। लेकिन वहाँ तो हर मकान के ऊपर एन्टीना थे। हम क्या करें ? हम समझ गया कि हमें खो गए | मैं रोने लगी  |गोपू और लल्लू भी डर हो गए | अंत में मनोहर चाचा आकर हमें ले गए | मनोहर चाचा के घर में हम तीनों  टीवी देखने के लिए हमें बेसब्री से बैठा  | लेकिन दुर्भाग्य है कि टीवी चलाते समय बिजली चली गई | किसी को बिना बताए घर से निकल जाने को यह ईश्वर की सजा है | आगे से ऐसा नहीं करूंगी । घरवालों से कहकर ही कहीं जाऊँगी ।


19. मान ले गोपू इस घटना के बारे में कहकर अपने दोस्त को एक पत्र लिखा | गोपू का वह पत्र कल्पना करके लिखें  |

उत्तर :

 प्रेक्षक 

गोपू निवास

ए बी स्ट्रीट

सुन्दर नगर 

हिमाचल प्रदेश -02


20 जून 2023


प्रिय श्याम,

 कैसे हो तुम? सोचता हूँ तुम कुशल हो | तुम्हारी पढ़ाई कैसे चल रही है ? अगले छुट्टी में  तुम यहाँ आओगे ?

श्याम, मैं तुमसे एक महत्वपूर्ण बात साझा करना चाहता हूँ | आज मैं, लल्लू और चुन्नी चुपचाप टीवी देखने के लिए  घर से निकला  और अगले गांव के  मनोहर चाचा का घर गए | कितने खुश में था हम उसी समय | रास्ते बहुत कठिन था  | एक बार  सब्जी मंडी कीभीड़ में लल्लू पीछे रह गया और चुन्नी एक लंबा आदमी को टकरा गई | सड़क पार करते समय एक बस हमें टक्कर मारने आई | ड्राइवर ने जोर से ब्रेक लगाकर हमें डांटा | मनोहर चाचा का घर इतना दूर था, यह जानता नहीं था। बेचारे लल्लू और सुन्नी  मेरी बातों पर विश्वास कर गए। मेरा तो एक ही निशान था- एन्टीना। लेकिन वहाँ तो हर मकान के ऊपर एन्टीना थे। मैं क्या करूँ? हम समझ गया कि हमें खो गए | चुन्नी रोने लगी  | मैं और लल्लू भी डर हो गए | अंत में मनोहर चाचा आकर हमें ले गए | मनोहर चाचा के घर में हम तीनों  टीवी देखने के लिए हमें बेसब्री से बैठा  | लेकिन दुर्भाग्य है कि टीवी चलाते समय बिजली चली गई | किसी को बिना बताए घर से निकल जाने को यह ईश्वर की सजा है | आगे से ऐसा नहीं करूँगा। घरवालों से कहकर ही कहीं जाऊँगा।

 मैं अपने पत्र समाप्त करता हूँ | अपने सभी परिवार के लिए मेरे हार्दिक संबंध व्यक्त करें।

 तुम्हारी प्यारा मित्र

गोपू

(हस्ताक्षर)



 सेवा में  

श्याम

श्याम निवास

हिमाचल -08



Class 9 Hindi पुल बनी थी माँ’

 पुल बनी थी माँ


 1. पुल बनी थी माँ ‘ कविता की रचयिता कौन है ?

उत्तर :

नरेन्द्र पुंडरीक

2. पुल बनी थी माँ’ से क्या तात्पर्य है?

उत्तर:

जैसे एक पुल दो किनारों को आपस में जोड़ता है, वैसे ही माँ परिवार के हर सदस्य को प्रेम से जोड़े रखती है।  इसका मतलब यह है कि माँ परिवार में प्रेम का पुल बनती है।

3. किसके बीच पुल बनी थी माँ ?

उत्तर :

 कवि और उसके भाइयों के बीच |

4. जिस माध्यम से कवि और उनके भाइयों बेधड़क दौड़ रहे थे?

उत्तर :

माँ द्वारा बनाया गया प्यार के पुल से |

5. माँ रूपी पुल से बच्चों की जिंदगी रूपी रेल गाड़ी कैसे दौड़ती रही थी?

उत्तर :

बेधडक बिना हरी लाल बत्ती के।

6. "बेटों का जीवन बेरोकटोक चलती गाड़ी के समान रहा।" - सामान आशयवाली पंक्तियां कविता से चुनकर लिखें |

उत्तर:

दौड़ती रहती थी बेधड़क
बिना किसी हरी लाल बत्ती के
हम लोगों की छुक छुक छक छक

7. 'बेधड़क ' का मतलब क्या है?

उत्तर :

बिना डर के

8. माँ कब कवि और उसके भाईयों के बीच पुल बनी थी ?

उत्तर :

उनके पिता की मौत के बाद

9. ‘बुढ़ा रही है माँ’ इसका आशय क्या है?

उत्तर:

 इसका मतलब यह है कि  माँ के शरीर पर बुढ़ापे का निशानी दिखने लगा। वह शारीरिक और मानसिक रूप से कमज़ोर होने लगी।

10. बच्चे कैसे समझ गए कि माँ बूढ़ी है?

उत्तर :
माँ की बार बार कहने की आदत से और उनके टूटी आवाज़ से |

11.  "माँ की देख-भाल की ज़िम्मेदारी बेटों पर आ गई।" - समाना आशयवाली पंक्तियां चुनकर लिखें |

उत्तर:

हाथों हाथ रहती माँ
एक दिन हमारे कंधों में आ गई |

12. क्या हुआ जब माँ बूढ़ी हो गई ?

उत्तर :

बूढ़ी हो गई तो माँ बच्चों के कंधो में आ गई |

13. "माँ एक दिन हमारे कंधों में आ गई " - इसका मतलब क्या है ?

उत्तर :

बूढ़ी हो गई तो बच्चों को अपनी माँ की देखभाल की ज़िम्मेदारी उठानी पड़ी |

14. "माँ की देखभाल की जिम्मेदारी बच्चों पर बोझ बन गई।" - समान आशयवाली पंक्तियों कविता से चुनकर लिखें | |

उत्तर :

धीरे-धीरे महसूस करने लगे हम
अपने वृषभ कंधों में
माँ का भारी होना।

15. 'वृषभ कंधों' - इसमें विशेषण शब्द कौन सा है ?

उत्तर :

वृषभ

16. 'वृषभ कंधों' - इसमें  'वृषभ' शब्द कौन सा है ?

उत्तर :

विशेषण

 17. सही मिलान करें |

 वृषभ कंधा          -  दुर्बल होना

 हाथों हाथ रहना   -  दायित्व बदलना 

 महसूस करना      -  मर जाना 

 बेधड़क               -  दुर्बल होती रही

 टूटती रही            -   बिना बाधा के

 कंधों से उतरना    -   अनुभव करना

 कंधा उतरना        -   सशक्त कंधा

 कंधा बदलना       -   संभालना  

उत्तर :

वृषभ कंधा          -  सशक्त कंधा

 हाथों हाथ रहना   -  संभालना

 महसूस करना      -  अनुभव करना  

 बेधड़क               -   बिना बाधा के

 टूटती रही            -   दुर्बल होती रही

 कंधों से उतरना    -    मर जाना 

 कंधा उतरना        -   दुर्बल होना

 कंधा बदलना       -   दायित्व बदलना

18. ‘माँ आख़िर माँ ही तो है’ इससे आपने क्या समझा?

उत्तर:
इसका मतलब है कि माँ अपने बच्चों के बारे में सबकुछ जानती है। सारी जिंदगी बच्चों के लिए जीनेवाली माँ बुढ़ापे में बच्चों के लिए भार बन गई। पर माँ का मातृत्व बच्चों की इस कठिनाई को सह नहीं पाया। वह स्वयं उनके कंधों से उतर गई मतलब उसका अंतिम प्रयाण हो गया।

19. "उतर गए हमारे कंधे " - इसका मतलब क्या है ?

उत्तर :

 हम दुर्बल हो गए  |

20. "हमारे कंधों से उतर गई माँ " - इसका मतलब क्या है ?

उत्तर :

 माँ मर गई  |

 21. "बेटे अपने दायित्व बदलते रहे। " - समान आशयवाली पंक्तियां चुनकर लिखें |

उत्तर:

जब तक जीवित रही माँ।
हम बदलते रहे अपने कंधे

22. "माँ के चले जाने से बेटे बेसहारे बने।"- समान आशयवाली पंक्तियां चुनकर लिखें |


उत्तर:

और माँ के कंधों से उतरते ही
उतर गए हमारे कंधे

23. "पुल बनी थी माँ" कविता की आशय पर टिप्पणी लिखें |

उत्तर :
पुल बनी थी माँ 

समकालीन हिंदी साहित्य के प्रमुख कवी श्री.नरेन्द्र पुंडरीक की एक सुन्दर कविता है" पुल बनी थी माँ । इस कविता में कवि सरलता से वर्णन करता है कि बुढ़ापन व्यक्ति को कैसे प्रभावित करती है | 

    कविता की पहली पंक्तियाँ यह बताती है कि माँ के हाथों में बच्चे कितने सुरक्षित हैं। अपने बच्चों के बीच, माँ प्रेम और सुरक्षा रूपी एक पुल बनती है और जिनसे बच्चों की जिंदगी रूपी रेल गाड़ी बेधडक बिना हरी लाल बत्ती के दौड़ती रही है | कवी कहते हैं कि माँ रुपी वह पुल अचानक नहीं टुटा | लेकिन धीरे-धीरे माँ के शरीर पर बुढ़ापे का निशानी दिखने लगा। वह शारीरिक और मानसिक रूप से कमज़ोर होने लगी। माँ की बार बार कहने की आदत से और उनके टूटी आवाज़ से बच्चे समझते हैं  कि बूढ़ी हो गई माँ |

बूढ़ी होने के बाद माँ की देख-भाल की ज़िम्मेदारी बेटों पर आ गई | उस समय माँ बच्चों केलिए एक बोझ बन गई और बच्चे अपने दायित्व बदलते रहे | इसे देखकर माँ बहुत दुखी हुई | यहाँ कवी कहते है कि "माँ आख़िर माँ ही तो है" | इसका मतलब है कि माँ अपने बच्चों के बारे में सबकुछ जानती है। सारी जिंदगी बच्चों के लिए जीनेवाली माँ बुढ़ापे में बच्चों के लिए भार बन गई। पर माँ का मातृत्व बच्चों की इस कठिनाई को सह नहीं पाया। वह स्वयं उनके कंधों से उतर गई मतलब उसका अंतिम प्रयाण हो गया। माँ की मरने के के बाद बच्चे यह पहचानते हैं कि माँ के बिना वे बेसहारे हैं।
    वर्तमान संदर्भ में यह कविता बहुत प्रासंगिक है । 'भोगे और फेंको' संस्कृति के गुलाम होती रही नई पीढ़ी को माता-पिता बोझ बन जाते हैं। उन्हें एक ही विचार है कि इस बोझ को किसी न किसी रूप में छोड दें। इसलिए ही हमारे समाज में वृद्ध मंदिरों की संख्या बढती जा रही है। निश्चय ही यह कविता हमें एक बार फिर सोचने के लिए बाध्य बना देती है।

Thursday, May 4, 2023

Class 9 English Tolstoy farm


Tolstoy Farm

                                       Mahatma Gandhi

Tolstoy Farm was the first ashram established by Mahatma Gandhi in South Africa.  The ashram served as the headquarters of the campaign of satyagraha against discrimination against Indians

As the Farm grew, it was found necessary to provide education for the boys and girls who inhabited there.  There were not many qualified Indian teachers , and even when available, none were ready to work there which was twenty-one miles distant from the town. So Gandhi thought that it was not necessary, to engage special teachers for the students.

For Gandhi, Tolstoy Farm was a family, in which he (Gandhi) acquired the position of the Father. It was quite difficult for him to do justice with all the young people present over there as they had been brought up in different conditions and environments. But Gandhi had always given the priority to the culture of the heart or the building of character, and for him moral training could be given to all alike, no matter how different their ages and their upbringing were.  

Gandhi always tried to teach every youngsters some useful manual vocation. For this purpose Mr. Kallenbach went to a Trappist monastery and returned having learnt shoe-making. Mr. Kallenbach had some experience of carpentry so the candidates had a small class in carpentry too.Tolstoy Farm was a perfect laboratory where Gandhiji experimented his ideas on education. Here the inmates were given a strong foundation in character building as well as in vocational training.  We must remember his words: “Education which does not mould character is absolutely worthless”. Physical activities like digging pits, felling timber, lifting loads  that were practiced in the Tolstoy Farm helped students to develop a sturdy body while vocational training given in carpentry, shoe making and gardening helped them to become self-sufficient at a very young age itself.

On Tolstoy Farm it was a rule that the youngsters should not be asked to do what the teachers did not do, and therefore, when they were asked to do any work, there was always a teacher co-operating and actually working with them. The youngsters had never even dreamt that they would have to learn these things some day. For generally the only training that Indian child received in South Africa was in the three R’s.Gandhiji believed that a balanced education of body, mind and spirit is what everyone needed. He questioned the Three R’s tradition of reading, writing and arithmetic and gave ample importance to the building up of one’s character

Wednesday, May 3, 2023

Class 9 English Song of a Dream by Sarojini Naidu

Song of a Dream

Sarojini Naidu

 Read the following lines from the poem ' 'Song of the Dream' and answer the questions that follow :

ONCE in the dream of a night I stood

Lone in the light of a magical wood,

Soul-deep in visions that poppy-like sprang;

And spirits of Truth were the birds that sang,

And spirits of Love were the stars that glowed,

And spirits of Peace were the streams that flowed

In that magical wood in the land of sleep.

1. Where did the poet stand lonely in the dream of a night?

Answer :

The poet stood in the light of a magical wood

2. What are the spirits of Peace compared to?

Answer:

The spirits of Truth are compared to birds that sang in the magical wood.

3.What are the spirits of love compared to?

Answer:

The spirits of Love are compared to stars that glowed in the magical wood.

4. What are the spirits of peace compared to?

Answer :

The spirit of Peace are compared to the streams that flowed through the magical wood.

5. "And spirits of Truth were the birds that sang" - What is the figure of speech used here.

Answer :

Metaphor

6.  "And spirits of Love were the stars that glowed," - What is the figure of speech used here.

Answer :

Metaphor

7. "And spirits of Peace were the streams that flowed," - What is the figure of speech used here.

Answer :

Metaphor

8. "Soul-deep in visions that poppy-like sprang;" - What is the figure of speech used here.

Answer :

Simile

9. Pick out an instance for simile from the poem.

Answer :

Soul-deep in visions that poppy-like sprang;

10. Pick out an instance of alliteration from the given lines.

Answer :

Lone in the light

11. Pick out an instance for auditory image.

Answer :

Birds that sang

12. Pick out the instances for visual images.

Answer

The stars that glowed.

The streams that flowed.

13. What is the rhyme scheme used here?

Answer :

aabbccd

14. Find out the rhyme words from the stanza?

Answer:

Stood - Wood

Sprang - Sang

Glowed - flowed

15. What does the poet compare the soulful visions to? Comment.

Answer:

The poet compares soulful visions to poppy flowers that bloom. They intoxicate like poppies. It is an example of a simile.

16. Where did the spirit of peace flow?

Answer :

Through the magical wood, the land of sleep

17. What is the magical wood referred to here?

Answer :

It's an imaginary place without any evils. The place is filled with truth, peace and love.

18. Who is the 'I' referred to here?

Answer :
The poet / Sarojini Naidu

19. How did the birds appeare to the poet?

Answer :

 The birds appeared to the poet as the spirit of truth.

20. Was there anyone with the poet? Pick out the lines that  support your answer.

Answer :

No. The poet was alone in that magical wood.

The lines "ONCE in the dream of a night I stood / Lone in the light of a magical wood show that she was alone in the wood.

21. Where does the poet find the magical wood?

Answer :

In her dream of a night 

Read the following lines from the poem ' 'Song of the Dream' and answer the questions that follow :

Lone in the light of that magical grove,

I felt the stars of the spirits of Love

Gather and gleam round my delicate youth,

 And I heard the song of the spirits of Truth;

 To quench my longing I bent me low

By the streams of the spirits of Peace that flow

In that magical wood in the land of sleep.

22. What do the spirits of love do?

Answer:

The spirits of Love gather and gleam round the poet’s delicate youth.

23. How does the poet quench her longing?

Answer:

The poet quenches her longing by bending low by the stream of the spirits of Peace.

24. What messages does the poem convey?

Answer :

The poem conveys the message that there should be a world with spirits of Truth and Love and Peace all the time.

25. Prepare a note of appreciation about the poem  ' Song of a Dream '

The Magical Wood

‘Song of a Dream’ is a beautiful philosophical poem written by Sarojini Naidu, the Nightingale of India . In this poem, the poet dreams of a land filled with the love, the peace and the truth. The poet says that in her dream of a night, she stood alone in a magical wood.  In that land of sleep, she saw many birds singing. She compared them as the spirits of truth. Then she saw there the glowing stars which she referred as the spirits of love. And  a beautiful stream was also flowing through that magical Wood. She calls it as the spirits of peace.

The poem can be considered as the poet’s deep desire to escape the sufferings she had to endure in a world of injustice. The poem can be read in the light of India’s freedom struggle. The three qualities (truth, love and peace) that the poet mentions were being violated in British period. The poem thus calls forth the people of India to live a harmonious life abandoning castism, superstitions and many other social evils that existed then and that exist even now.

The poet uses many poetic devices to make her poem more attractive. She maintains a perfect rhythm and a rhyming scheme (‘aabbccd’, stood-wood, sprang-sang, glowed-flowed) throughout the poem . The phrases ‘gather and gleam’, ‘lone in the light’ gives alliterative effect of repeated consonant sounds. The expression 'visions that poppy like sprang' gives an instance for simile. And the phrases like ‘Spirits of Truth were the birds, 'Spirits of Love were the stars' and 'Spirits of Peace were the streams’ are examples for metaphor. The poetic device of personification can be seen in the line ‘stars gathering around my delicate youth’. The poem brings the auditory image, ‘birds that sang’ as well as visual image ‘stars that glowed and the streams of peace flowed through the land’. The poet brings in strong sensual imagery throughout the poem.

Tuesday, May 2, 2023

Class 9 Maternity Questions & Answers

MATERNITY

Lilika Nakos

 Read the following passage from the story 'Maternity' and answer the questions that follow :

 It was more than a month since they were at Marseilles. The camp of Armenian refugees on the outskirts of the town already looked like a small village. They had settled down in any way they could: the richest under tents; the others in the ruined sheds; but the majority of the refugees, having found nothing better, were sheltered under carpets held up at the four corners by sticks. They thought themselves lucky if they could find a sheet to hang up at the sides and wall them from peering eyes. Then they felt almost at home. The men found work- no matter what - so that in any case they were not racked with hunger and their children had something to eat. Of all of them, Mikali alone could do nothing. He ate the stale bread which his neighbours cared to offer and it weighed on him. For he was a big lad of fourteen, healthy and robust. But how could he think of looking for work when he literally bore on his back the burden of a new-born babe? Since his birth, which had caused his mother's death, he had wailed proclaiming his famished state from morn till night. Who would have accepted Mikali's services when his own compatriots had chased him from their quarters because they were unable to bear the uninterrupted howls which kept them awake at night.

1. Where did the Armenian refugees make their shelters?

Answer :

At Marseilles.

2. How did the camp of Armenian refugees look like?

Answer :

It looked like a small village.

3. How did they settle down in the camp?

Answer :

They had settled down in any way they could: the richest under tents; the others in the ruined sheds; but the majority of the refugees, having found nothing better, were sheltered under carpets held up at the four corners by sticks.

4. Why didn't Mikali go for a job?

Answer :

Mikali's mother died at the birth of her second child. So, Mikali had to look after his new-born brother. Nobody gave him a job because the burden of the baby was always on his shoulders and its uninterrupted howling made everyone annoyed.

5. What did Mikali eat?

Answer :

He ate the stale bread which his neighbours cared to offer and it weighed on him.

6. What kind of a boy was Mikali?

Answer :

Mikali was a big lad of fourteen, healthy and robust.

7. Pick out a word from the passage that means 'as in hungry'  

Answer :

Famished

8. Pick out a word from the passage that means ' very strong and healthy' 

Answer :

Robust

9. Pick out a word from the passage that means ' fellow countryman '

Answer :

compatriots

10. Why did Mikali's compatriots case him away?

Or

Why was he chased away by his fellow Armenians?

Answer :

Because they couldn't bear the uninterrupted howling of Mikali's new-born brother. The baby cried for milk all the time.  So, the people in the camp didn't get much sleep.

11. Describe the life of the refugees in the camp.

Answer:

The men found works and so that they and their families had something to eat.

Read the following passage from the story 'Maternity' and answer the questions that follow :

Mikali himself was dazed by these cries; his head was empty and he wandered about like a lost soul, dying from lack of sleep and weariness, always dragging about with him the deafening burden that had been born for his misfortune - and its own - and that had so badly chosen the moment to appear on this earth. Everybody listened to it with irritation - they had so many troubles of their own - and they all pitifully wished it would die. But that did not happen for the new-born child sought desperately to live and cry louder his famished state. The distracted women stuffed their ears and Mikali wandered about like a drunken man. He hadn't a penny in his pocket to buy the infant milk and not one woman in the camp was in a position to give it the breast. Enough to drive one mad!

12. Why did Mikali wander about like a lost soul?

Answer :

The new-born baby on his back made cries all the time. So he couldn't get any job, food and even a shelter. His fellow refugees also drove him away from the camp. That is why Mikali wandering about like a lost soul.

13. Who is mentioned here as 'deafening burden'.

Answer :

Mikali's new-born brother. 

14. Why did the people of the camp pitifully wished the infant would die?

Answer :

Because they couldn't bear the uninterrupted howling of Mikali's new-born brother. The baby cried for milk all the time.  So, the people in the camp didn't get much sleep and comfort. They had so many troubles of their own. So they wished it would die.

15. Why couldn’t Mikail earn even a penny?

Answer:

Nobody offered Mikail work because he had with him his new-born brother. His mother had died at childbirth.

16. What made Mikali mad?

Answer :

The new- born baby cried louder for milk. Mikali hadn't a penny in his pocket to buy the infant milk and not one woman in the camp was in a position to give it the breast.

17. Pick out a word from the passage that means 'filled with something'.

Answer :

Stuffed

18. Mikali wandered like a ‘lost soul.’ Comment on the comparison.

Answer:

Mikali did not get any help or shelter from his camp. So, As a lost soul wanders around looking for peace and rest, Mikali too was wandering.

Read the following passage from the story 'Maternity' and answer the questions that follow :

One day, unable to bear it further, Mikali went to the other side of the place where the Anatolians were: they also had fled from the Turkish massacres in Asia Minor. Mikali had been told that there was a nursing mother there who might take pity on his baby. So there he went, full of hope. Their camp was like his - the same misery. Old women were crouched on pallets on the ground; barefooted children played about in pools of dirty water. As he approached, several old women rose to ask what he wanted. But he walked on and stopped only at the opening of a tent. From the interior of the tent came the sound of a wailing infant. "Have pity on this poor orphan and give him a little milk. I am a poor Armenian . . .", he said in Greek. At his appeal, a lovely, dark woman appeared. She held in her arms an infant blissfully sucking the maternal breast, its eyes half-closed. "Let's see the kid. Is it a boy or a girl?" Mikali's heart trembled with joy. Several neighbours had come closer to see and they helped him to take from his shoulders the sack where the baby brother was held; with curiosity they leaned over. He drew back the cover. The women gave vent to various cries of horror. The child had no longer anything human about it.  The head had become enormous and the body, of an incredible thinness, was all shrivelled up. As until then it had sucked only its thumb, it was all swollen. It was dreadful to see! Mikali himself drew back in fright. All of them together chased him away, threatening. His eyes filled with tears, he went off, bearing the little child still wailing in its hunger.

18. Why did Mikali go to Anatolians camp?

Answer :

Mikali had been told that there was a nursing mother there who might take pity on his baby. So there he went, full of hope.

19. What were the miserable sights could be seen in Anatolians' camp?

Answer :

Old women were crouched on pallets on the ground; barefooted children played about in pools of dirty water.

20. Why  did not Mikali stop when the old women rose to ask him what he wanted?

Answer :
Because he wanted to see the nursing mother as soon as he could possible.

21. Where did Mikali Stop his walking?

Answer :

Mikali stopped at the opening of a tent where the nursing mother lived.

22. What did Mikali request the nursing mother?

Answer :

Mikali introduced himself as he was a poor Armenian and requested to have pity on his new-born brother and give him a little milk.

23. When did Mikali's heart tremble with joy?

Answer :

When the nursing mother agreed to give his new- born brother breast milk. She asked if she could see the kid and enquired whether it was a boy or a girl. On hearing this Mikali became very happy.

24. Why did the women give vent to cries of horror?

Answer:

The child had no longer anything human about it. The head had become enormous and the body was all shrivelled up. As until then it had sucked only its thumb, it was all swollen. So, the women give vent to cries of horror.

25. What was the dreadful sight did Mikali and others see?

Answer :

The child had no longer anything human about it. The head had become enormous and the body was all shrivelled up. As until then it had sucked only its thumb, it was all swollen.

Read the following passage from the story 'Maternity' and answer the questions that follow :

There was nothing to be done; the child was condemned to die of hunger. Mikali felt himself immensely alone and lost. A chill ran up his spine at the thought that he was carrying such an unlucky child. He slumped down in the shadow of a shed. It was still very warm.
The country spread out before him in arid, waste land, covered with refuse. Noon rang out somewhere. The sound reminded him that he had eaten nothing since the day before. He would have to go sneaking about the streets, round cafe terraces, filching some half-eaten roll left on a plate; or else, rake about in the garbage for what a dog would not have eaten. Suddenly, life seemed to him so full of horrors that he covered his face with his hands and began to sob desperately. When he raised his head a man stood before him gazing down upon him. Mikali recognized the Chinaman who often came to the camp to sell paper knick-knacks and charms which no one ever bought from him anyway. Often they mocked him because of his colour and his squint eyes. Mikali saw that he was looking gently down at him and moving his lips as though to speak. Finally the Chinaman said: "You mustn't cry, boy. . . ." Then, timidly: "Come with me..
Mikali's only answer was to shake his head negatively; he longed to flee. He had heard so many horrors about the cruelty of the Orientals! Yet the man remained there and did not budge. So, being in great distress, Mikali followed him. What more awful thing could happen to him? As they walked along he stumbled weakly and almost fell with the child. The Chinaman came to him and taking the baby in his arms, tenderly pressed it to him.

26. "the child was condemned to die of hunger" - Who was the child mentioned here? What happened to him?

Answer :

The child referred to here is the new-born brother of Mikali. He lost his mother at his birth.He had no other ways to get breast - milk. So the child was nearing his death in hunger.

27. Why did he feel immensely alone and lost?

Answer:

Mikali didn't get food and shelter. He was helpless and his life was full of misery. He was driven away by people. Moreover, he had no other ways to feed his new - born brother with breast milk. He was sure that the baby would die in hunger. So he felt immensely alone and lost.

28. How did Mikali find food for living?

Answer :

He would have to go sneaking about the streets, round cafe terraces, filching some half-eaten roll left on a plate; or else, rake about in the garbage for what a dog would not have eaten. 

29. Why did he sob?

Answer:

Mikali didn't get any food and shelter. He would have to go looking for some half-eaten roll left on a plate; or else, rake about in the garbage for what a dog would not have eaten. Suddenly, life seemed to him so full of horrors that he covered his face with his hands and began to cry badly.

30. Who was the man came forward to help Mikali?

Answer :

The Chinaman who often came to the camp to sell paper knick-knacks and charms.

31. In what way is the Chinaman different from the refugees?

Answer:
While all the refugees tried to drive away Mikali, the Chinaman came forward and helped Mikali to overcome the difficult situation. He was kind-hearted and helpful.

32. Why did Mikali refuse to go with the Chinaman at first?

Answer :

Mikali feared that the Chinaman would harm him because he had heard so many horrors about the cruelty of the Orientals.


Read the following passage from the story 'Maternity' and answer the questions that follow :

They crossed several empty lots and then, the man took a little lane that led them to a sort of wooden cabin surrounded by a very small garden. He stopped before the door and clapped his hands twice. A few light steps 
inside and a tiny person came to open the door. Seeing the men, her face reddened and then a happy smile lit it up. She made a brief courtesy to them. As Mikali remained there, hesitatingly rooted to the threshold, the Chinaman said to him: "Come in, then; do not be afraid. This is my wife." Mikali went into the room, rather large it seemed, separated in the middle by a coloured paper screen. It was all so clean and neat, though very poor looking. In the corner he noticed a wicker cradle. "That is my baby," said the young woman cocking her head graciously to one side and smiling at him. "He is very tiny and very beautiful; come and see." Mikali went up closer and silently admired it. A chubby baby, but lately out of the darkness of the maternal body, slept peacefully, covered with a gold brocade cloth, like a little king. Then the husband called his wife over. He told her to sit on a straw mat. Without a word, he set down on her lap the little famished one, bowing deeply before her. The woman leaned over with astonishment and drew back the covering in which the child was wrapped. It appeared to her in all its skeletonic horror. She gave a crya cry of immense pitythen pressed the babe to her heart, giving it the breast. Then, with a gesture of modesty she brought forward a flap of her robe over the milk-swollen breast and the poor, gluttonous infant suckling there.

33. Where did the Chinaman take Mikali?

Answer :

Chinaman took Mikali his to his own home.

34. How did the Chinaman’s wife behave when she saw Mikali with her husband?

Answer:

Seeing the men, her face reddened and with a happy smile she made a brief courtesy to them.

35. What did the Chinaman’s wife do when she saw the famished infant?

Answer:

She gave a cry of immense pity and then pressed the baby to her heart, giving it the breast. Then, with a gesture of modesty, she brought forward a flap of her robe over the milk-swollen breast and the poor, gluttonous infant suckling there.

36. Pick out a word from the passage that means ' surprise'.

Answer :

astonishment

37. Pick out a word from the passage that means "excessively greedy"

Answer :

gluttonous

38. What is mentioned here as "skeletonic horror"?

Answer :

The new - born baby who looked like a skeleton due to lack of food.

39. Prepare a Character sketch of Mikali.

Answer :

Mikali - A Responsible Brother 

Mikali was the central character of the story 'Maternity' written by the popular Greek writer Lilika Nakos. He is a Armenian refugee boy who shelters at the refugee camp of Marseilles. He is a fourteen years old orphan . His mother died at the birth of his younger brother. So, Mikali had to look after the new-born baby. He always carries the baby on his back. The infant cries every time in hunger. Mikali had no money to buy some milk for the baby and moreover nobody in the camp ready to feed the infant with brest milk.  The uninterrupted cries of the infant make every one mad. They couldn't even get enough sleep. So the people in the camp drives away Mikali. Though Mikali is very strong and healthy, nobody gives him a job as he gets the burden of the new - born baby. Anyhow, Mikali tries to withstand all these difficulties. He searches everywhere for a woman who can feed his infant brother. He is never willing to let his brother die in hunger. This shows that he is very determined, bold and also a responsible brother.

40. Mikali could never forget the day his little brother was fed by the Chinaman's wife. He records his thoughts and feelings in his diary. Write the diary entry.

Answer :

May 20, 2023

Monday

What an unforgettable day it was! Hoe can I forget those moments? The Chinese man appeared before me like a god as I thought that everything was over!  How kind he was! He took me to his home and introduced his wife. His wife greeted me very warmly. What a lovely couple! I felt like home there. Without any hesitation, she got ready to feed my infant brother with her breast milk.  I could see the greatness of maternity there. She is really a good mother and and an angel of mercy. Today my little brother got a new birth. It's only because of the Chinaman and his wife. I really owed to them. May God bless them. I can never forget this day.

41. Prepare a news paper report of Mikali’s life in the camp

The quest for maternity 

Marseilles:The pathetic sight of Mikali, a 14 year old orphan boy wandering with a crying infant, shocked the world yesterday. Mikali, a poor victim of war is forced to carry the motherless and famished brother on his back . The starving cries of the infant has become a disturbance to other people of the camp. Mikali does not get food ,work or shelter.  Even the women in the refugee camps are not ready to feed the baby. They all horrified to look at the child which has an enormous head and a thin body as it was starving since its birth. Many people who lost their sleep by the uninterrupted cries of the infant, pitifully wished that the child would die. What a tragic plight it was! Mikali is wandering from camp to camp in search of a nursing mother. The picture of Mikali and the helpless child is reported to have strengthened the common request to end war.

42. Prepare a narrative of the story 'Maternity'.

Answer :

The Greatness Of Maternity

 “Maternity” is a heart touching story written by the popular Greek writer, Lilika Nakos. The story describes the misery and sufferings of a fourteen-year-old orphan boy named Mikali who was an Armenian refugee. The story comprises of three main settings- a camp of Armenian refugees, a camp of Anatolian refugees and a house of a Chinaman. The story deals with the uncertainties occurred in the life of Mikali and his new born brother in a refugee camp in Marseilles.

Mikali's mother had died while giving birth to his brother. So he had to look after his new-born brother. Since the baby was kept on his back, he was unable to do any job or earn his livelihood. The other refugees lost their sleeps as the famished infant was crying continuously whole the day. They even wished that the baby would die. At last the refugees drove Mikali away from the camp.

Mikali went straight to the camp of Anatolians. He had heard that there was a nursing mother in the camp. So he reached there with full of hope. But unfortunately the women in the camp of Anatolians became afraid as they saw the Skeltonic structure of the infant. The child had no longer anything human about it.  The head had become enormous and the body, of an incredible thinness, was all shrivelled up. As until then it had sucked only its thumb, it was all swollen. It was dreadful to see! Mikali himself drew back in fright. Then Mikali was chased away from there too.

There was nothing to be done; the child was condemned to die of hunger. Mikali felt himself immensely alone and lost. What should he do? At that time a Chinaman reached there. The Chinaman took Mikali to his home and introduced him to his wife. The Chinaman's wife felt immense pity on the infant. She fed the baby with her breast milk. By portraying the Chinaman's wife as an ideal mother, the writer upholds the nobility of 'maternity'.