Friday, June 2, 2023

सुख दुख Class 8 Hindi Notes

सुख-दुख

1. 'सुख-दुख' किस विधा की रचना है ?

उत्तर :

कविता

2. सुख दुख कविता किसकी रचना है?

उत्तर :

सुमित्रानंदन पंत

3. 'अप्रत्यक्ष' के अर्थ में प्रयुक्त शब्द कौन सा है ?

उत्तर :

ओझल

4. जीवन कैसे परिपूर्ण होता है ?

उत्तर :

सुख-दुख के मधुर मिलन से जीवन परिपूर्ण होता है।

5. 'दिवा' शब्द का समानार्थी शब्द कौन सा है ?

उत्तर :

दिन

6. 'रात' शब्द का समानार्थी शब्द कौन सा है ?

उत्तर :

निशा

7. 'चाँद' शब्द का समानार्थी शब्द कौन सा है ?

उत्तर :

शशि

8.‘सुख-दुख की खेल मिचौनी खोले जीवन अपना मुख।’ इन पंक्तियों का आशय क्या है?

उत्तर :

सुख और दुख जीवन के दो पहलू हैं। जीवन में सुख और दुख का होना स्वाभाविक है। जीवन का असली मुख सुख-दुख के मिलन में खुलता है।

9. ‘फिर घन में ओझल हो शशि फिर शशि में ओझल हो घन।’ यहाँ घन और शशि किन-किन के प्रतीक हैं?

उत्तर :

यहाँ घन दुख का और शशि सुख का प्रतीक है।

10. ‘अविरत सुख भी उत्पीड़न’ क्या आप इससे सहमत है? क्यों?

उत्तर :

मैं इससे सहमत हूँ। क्योंकि सुख और दुख जीवन के दो पहलू हैं।सुख-दुख के मधुर मिलन से जीवन परिपूर्ण होता है। हमेशा सुख हो तो जीवन की असलियत की पहचान नहीं होगी। सदा सुखी रहनेवालों के जीवन में दुख के आने पर उन्हें वह सामना करने नहीं सकते हैं |

11. कविता से शब्द युग्मों का चयन करके लिखें।

उत्तर :

सुख-दुख

निशा-दिवा

सोता-जागता

साँझ-उषा

विरह-मिलन

हास-अश्रु

12. 'मुख’ का समानार्थी शब्द कौन सा है ?

उत्तर :

आनन

13. 'मेघ’ का समानार्थी शब्द कौन सा है ?

उत्तर :

घन

14.'निरंतर’ का समानार्थी शब्द कौन सा है ?

उत्तर :

अविरत

15. 'संध्या’ का समानार्थी शब्द कौन सा है ?

उत्तर :

साँझ

16. 'सुख दुख' कविता की आशय पर टिप्पणी लिखें  |

उत्तर :

सुख दुख

हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि  श्री. सुमित्रानंदन पंत की एक सुंदर कविता है 'सुख-दुख'। इसमें कवि जीवन की असलियत को समझाने का कोशिश करता है। वे कहते हैं कि जीवन सुख-दुख पूर्ण है। सुख-दुख की खेलमिचौनी से जीवन अपना असली मुख खोलता है। कवि के मत में  सुख-दुख के मधुर मिलन से जीवन परीपूर्ण होता है।

निरंतर दुख और निरंतर सुख दोनों पीड़ा देनेवाले हैं।  सुख और दुख जीवन के दो पहलू हैं | हमेशा सुख हो तो जीवन की असलियत की पहचान नहीं होगी। सदा सुखी रहनेवालों के जीवन में दुख के आने पर उन्हें वह सामना करने नहीं सकते हैं|

सुख-दुख रूपी दिन-रात में संसार का जीवन सोता और जागता है। इस संध्या और उषा के आँगन में विरह और मिलन का आलिंगन हो रहा है। मानव जीवन का मुख सदा हँसी और आँसू से भरा है।

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